(26) शराबी की मैय्यत...जो पिए वो ही कांधा लगाए।
पंकज खन्ना, इंदौर। 9424810575 (नए पाठकों से आग्रह : इस ब्लॉग के परिचय और अगले/पिछले आलेखों के संक्षिप्त विवरण के लिए यहां क्लिक करें।🙏) संदर्भ के लिए पिछले आलेख क्रमानुसार: ( 1 ) ( 2 ) ( 3 ) ( 4 ) ( 5 ) ( 6 ) ( 7 ) ( 8 ) ( 9 ) ( 10 ) ( 11 ) ( 12 ) ( 13 ) ( 14 ) ( 15 )( 16 ) ( 17 ) ( 18 ) ( 19 ) ( 20 ) ( 21 ) ( 22 ) ( 23 ) ( 24 ) ( 25 ) ये गीत सत्तर के दशक के अंत में शराबियों के बीच में काफी प्रसिद्ध हुआ था। बस, ट्रक , टेंपो, पान की दुकानों, बार और कलालियों में ये कैसेट्स पर सुनाई पड़ जाता था। बेवड़ों के कैसेट्स में ये गाना जरूर होता था। अजीब ही शब्द थे इस गीत के: "ये शराबी की मैय्यत है, जो पिए वो ही कांधा लगाए!" सन 1976 में EMI ने इस 45 rpm के रिकॉर्ड को रिलीज़ किया था। ये एक प्राइवेट एल्बम थी जिसका नाम था: आशिकाना कव्वाली । इस एल्बम की पहली साइड में नूरजहां बेगम जयपुरी के दो गीत हैं और दूसरी साइड में शाहेदा बानो जयपुरी के दो गीत हैं। ये ब्लॉगपोस्ट शाहेदा बानो जयपुरी के पहले गाने के बारे में है। इस गीत को लिखा है नज़ीर उज्जैनी ने। रिकॉर...