Posts

Showing posts with the label 78 RPM

पिछले आलेखों का संक्षिप्त विवरण

पंकज खन्ना, इंदौर 9424810575 संदर्भ के लिए पिछले आलेख क्रमानुसार: ( 1 ) ( 2 ) ( 3 ) ( 4 ) ( 5 ) ( 6 ) ( 7 ) ( 8 ) ( 9 ) ( 10 ) ( 11 ) ( 12 ) ( 13 ) ( 14 ) ( 15 )( 16 ) ( 17 ) ( 18 ) ( 19 ) ( 20 ) ( 21 ) ( 22 ) ( 23 ) ( 24 ) ( 25 ) ( 26 ) ये   ब्लॉग  तवा संगीत  ,  तवों (78 RPM वाले Shellac या पत्थर के रिकॉर्ड्स) के संग्रह  और संगीत के  कुछ  अनछुए पहलुओं पर लिखा जा रहा है। अभी तक कुल 26 आलेख या आर्टिकल लिखे जा चुके हैं। इन तवों को पिछले तीन दशकों में कैसे एकत्रित किया गया, ये बताया गया है। इसमें गीत, संगीत, गायक, गायिकाओं, गीतकारों और  संगीतकारों  की कला के बारे में तो बातें की ही गई हैं पर इसके अलावा कबाड़ियों, एंटीक डीलर्स, संग्रहकर्ताओं और सुनकारों का जिक्र भी किया जा रहा है, जिनके बिना तवों के अस्तित्व का औचित्य ही नहीं है । साथ ही इसके ऐतिहासिक, तकनीकी और वैज्ञानिक पहलू के बारे भी  समय-समय पर चर्चा की जा रही हैं। साथ साथ में ब्लॉगर के बचपन और जवानी के तवा संगीत के अनुभवों को भी स्थान दिया गया है। इस ब्लॉग में असाधारण क्षमताओं वाल...

(25) अमीन सयानी की आवाज में बना इश्तेहारी तवा (सन 1976)

Image
पंकज खन्ना, इंदौर। 9424810575 पोस्टेड: 22/5/2024 (नए पाठकों से आग्रह : इस ब्लॉग के परिचय और अगले/पिछले आलेखों के संक्षिप्त विवरण के लिए  यहां क्लिक  करें।🙏) संदर्भ के लिए पिछले आलेख क्रमानुसार: ( 1 ) ( 2 ) ( 3 ) ( 4 ) ( 5 ) ( 6 ) ( 7 ) ( 8 ) ( 9 ) ( 10 ) ( 11 ) ( 12 ) ( 13 ) ( 14 ) ( 15 )( 16 ) ( 17 ) ( 18 ) ( 19 ) ( 20 ) ( 21 ) ( 22 ) ( 23 ) ( 24 ) आज हम जिस  तवे की बात कर रहे हैं वो पारंपरिक तवा है ही नहीं। तवा नहीं पापड़ है पापड़। बेहद पतला। ये Shellac या Vinyl का बना हुआ नहीं है। ये बना है पतले प्लास्टिक का।सन 1976 का मुद्रित। इसे  बनाया था Polydor Records नाम की कंपनी ने । इसे मोड़ दो , फेंक दो फिर भी बजता है। आज भी बजता है। और अच्छा बजता है, 48 सालों के बाद भी। इसमें आवाज और गीतों की झलक सिर्फ एक ही तरफ रिकॉर्ड की गई है और ये सफेद, लाल और नीले रंग में बना है। जरा झांकिए नीचे! दरअसल ये एक 45 RPM का Promotional LP या  Demo Record है। या कह लें एक तरह  का इश्तेहारी तवा है। इसे फिल्म  धर्मवीर (1977) के प्रमोशन के लिए बनाया गया था। लगभग ...

मेरे हज़रत ने मदीने में मनाई होली

Image
तवा संगीत: (21)  मेरे हज़रत ने मदीने में मनाई होली।  पंकज खन्ना, इंदौर। 9424810575 (नए पाठकों से आग्रह : इस ब्लॉग के परिचय और अगले/पिछले आलेखों के संक्षिप्त विवरण के लिए  यहां क्लिक  करें।🙏) संदर्भ के लिए पिछले आलेख क्रमानुसार: ( 1 ) ( 2 ) ( 3 ) ( 4 ) ( 5 ) ( 6 ) ( 7 ) ( 8 ) ( 9 ) ( 10 ) ( 11 ) ( 12 ) ( 13 ) ( 14 ) ( 15 )( 16 ) ( 17 ) ( 18 ) ( 19 ) ( 20 ) ( 21 ) शायद आपको थोड़ा अटपटा, अजीब सा लग रहा होगा इस आलेख का शीर्षक पढ़कर। होली तो सिर्फ वृंदावन और मथुरा की प्रसिद्ध है।अब ये किस होली की बात की जा रही है?  ये सन 1912 में गौहर जान (1873-1930) द्वारा लिखित और गाई गजल की पहली लाइन है। गौहर जान के बारे में हम पहले भी बात कर चुके हैं। चाहें तो इस लिंक को क्लिक करके पहले वाला आलेख दुबारा पढ़ सकते हैं। जैसा कि आप जानते हैं गौहर जान सम्पूर्ण भारत वर्ष की पहली मेगा स्टार सिंगर थीं। फिल्मी संगीत तो सन 1932 से शुरू हुआ था। पर ये उसके भी 30 साल पहले  संगीत की दुनिया में छा चुकी थीं।  पेशे से तवायफ कहलाती थीं।  खुद गजलें लिखती थीं और खूब गाती थीं। और हर ...

(14) तवे पर चित्रकारी।

Image
तवा संगीत: (14) तवे पर चित्रकारी पंकज खन्ना, इंदौर 9424810575 (नए पाठकों से आग्रह : इस ब्लॉग के परिचय और अगले/पिछले आलेखों के संक्षिप्त विवरण के लिए  यहां क्लिक  करें।🙏) संदर्भ के लिए पिछले आलेख क्रमानुसार: ( 1 ) ( 2 ) ( 3 ) ( 4 ) ( 5 ) ( 6 ) ( 7 ) ( 8 ) ( 9 ) ( 10 ) ( 11 ) ( 12 ) ( 13 ) ( 14 ) ( 15 )( 16 ) ( 17 ) ( 18 ) ( 19 ) ( 20 ) (21) चलो आज फिर बचपन की सुकून भरी जिंदगी में गुदगुदी करते हैं और कुछ नया वाला 'पुराना'  ढूंढ लाते हैं! बचपन की गर्मी की छुट्टियां बहुत लंबी और मनोरंजक होती थीं। सभी बच्चों के लिए मैदान थे। कुछ भी खेलो! क्रिकेट, फुटबॉल, हॉकी, गुल्ली-डंडा, सत्तोलिया , कंचे, पांचे, लंगड़ी, पॉकिट-बिल्ले-चिब्बी, लट्टू, खो-खो, कबड्डी, कुश्ती, आटया-पाटया, गुलाम-डंडी, टायर घूमाना, चोर-सिपाही, नदी-पहाड़, सहायता-छुट्टी और भी पता नहीं कितने देशी-विदेशी खेल होते थे। वो भला सीधा-साधा जमाना था। टीवी, कंप्यूटर और मोबाइल नहीं थे। मैदानों पर सरकारी अतिक्रमण नहीं था। बच्चे मैदानों पर सुबह-शाम खेलते नज़र आते थे क्योंकि जिमखाना मैदान टाइप के बीसियों  मैदान आम बच्चों के लि...

(13) ताड़ोबा और घोड़ा-छाप गाने।

Image
तवा संगीत: (13) ताडोबा और घोड़ा-छाप गाने! पंकज खन्ना, इंदौर 9424810575 (नए पाठकों से आग्रह : इस ब्लॉग के परिचय और अगले/पिछले आलेखों के संक्षिप्त विवरण के लिए  यहां क्लिक  करें।🙏) संदर्भ के लिए पिछले आलेख क्रमानुसार: ( 1 ) ( 2 ) ( 3 ) ( 4 ) ( 5 ) ( 6 ) ( 7 ) ( 8 ) ( 9 ) ( 10 ) ( 11 ) ( 12 ) ( 13 ) ( 14 ) ( 15 )( 16 ) ( 17 ) ( 18 ) ( 19 ) ( 20 ) (21) मोहल्ले में भारत के विभाजन की भीषण विभीषिका झेले बहुत सारे पंजाबी परिवार भी रहते थे। घरों का काम निपटा कर मोहल्ले की पंजाबी और अन्य जनानियां एक जगह इकठ्ठे होकर चारपाईयों पर मस्त पसर जाती थीं और सरसों, मेथी, पालक के पत्ते छांटते-छांटते; मुसलसल हिंदी/पंजाबी में हंसी-ठठ्ठा करती थीं।एक दूसरे को पीठ-पीछे अजीब से नामों से बुलाती थीं जैसे टालवाली, पीपेवाली, चड्डी, खन्नी, हकसरनी, शुक्ली, चिलकनी, तांगेवाली आदि। तांगेवाली जी के पति तांगा हांका करते थे और ये गप्पेँ। मोहल्ले में दोनों ही हिट थे। मोहल्ले के कुछ बच्चे तांगे में सेंट पॉल स्कूल जाया करते थे और ज्यादा बच्चे समीपस्थ जगन्नाथ स्कूल पैदल जाया करते थे। हम तो तभी से तांगों और घोड़ों से स...

(12) मेरठ के कबाड़ी बाजार में Disco!

Image
तवा संगीत: (12) मेरठ के कबाड़ी बाजार में Disco ! पंकज खन्ना, इंदौर 9424810575 (नए पाठकों से आग्रह : इस ब्लॉग के परिचय और अगले/पिछले आलेखों के संक्षिप्त विवरण के लिए  यहां क्लिक  करें।🙏) संदर्भ के लिए पिछले आलेख क्रमानुसार: ( 1 ) ( 2 ) ( 3 ) ( 4 ) ( 5 ) ( 6 ) ( 7 ) ( 8 ) ( 9 ) ( 10 ) ( 11 ) ( 12 ) ( 13 ) ( 14 ) ( 15 )( 16 ) ( 17 ) ( 18 ) ( 19 ) ( 20 ) (21) सन 2003 में बरेली से मेरठ ट्रांसफर हो गया। नई जगह मकान ढूंढना, सामान की पैकिंग, ट्रांसपोर्टेशन, अनपैकिंग , घर को नए सिरे से जमाना, बच्चे को अच्छे स्कूल में भर्ती करवाना और साथ ही नई जगह पर नए लोगों से समन्वय करते हुए काम भी शुरू करना; इतना आसान नहीं होता है। एक महीना तो एडजस्ट होने में लग ही जाता है। थोड़ा एडजस्ट हो गए तो अपनी औकात पे आ गए और सहकर्मियों से मेरठ के  खान-पान के अड्डों के बारे में, आसपास के पर्यटन के बारे में जानकारियां जुटाना शुरू कर दिया। पर्यटन और खान-पान हो गया, बस अब संगीत बचा था। एक दिन ऑफिस में छः सात सहकर्मियों के साथ  खाना खाने के दौरान  ये पूछ लिया कि मेरठ में कबाड़ी बाजार कहां है।...