(13) ताड़ोबा और घोड़ा-छाप गाने।
तवा संगीत: (13) ताडोबा और घोड़ा-छाप गाने! पंकज खन्ना, इंदौर 9424810575 (नए पाठकों से आग्रह : इस ब्लॉग के परिचय और अगले/पिछले आलेखों के संक्षिप्त विवरण के लिए यहां क्लिक करें।🙏) संदर्भ के लिए पिछले आलेख क्रमानुसार: ( 1 ) ( 2 ) ( 3 ) ( 4 ) ( 5 ) ( 6 ) ( 7 ) ( 8 ) ( 9 ) ( 10 ) ( 11 ) ( 12 ) ( 13 ) ( 14 ) ( 15 )( 16 ) ( 17 ) ( 18 ) ( 19 ) ( 20 ) (21) मोहल्ले में भारत के विभाजन की भीषण विभीषिका झेले बहुत सारे पंजाबी परिवार भी रहते थे। घरों का काम निपटा कर मोहल्ले की पंजाबी और अन्य जनानियां एक जगह इकठ्ठे होकर चारपाईयों पर मस्त पसर जाती थीं और सरसों, मेथी, पालक के पत्ते छांटते-छांटते; मुसलसल हिंदी/पंजाबी में हंसी-ठठ्ठा करती थीं।एक दूसरे को पीठ-पीछे अजीब से नामों से बुलाती थीं जैसे टालवाली, पीपेवाली, चड्डी, खन्नी, हकसरनी, शुक्ली, चिलकनी, तांगेवाली आदि। तांगेवाली जी के पति तांगा हांका करते थे और ये गप्पेँ। मोहल्ले में दोनों ही हिट थे। मोहल्ले के कुछ बच्चे तांगे में सेंट पॉल स्कूल जाया करते थे और ज्यादा बच्चे समीपस्थ जगन्नाथ स्कूल पैदल जाया करते थे। हम तो तभी से तांगों और घोड़ों से स...