(28) टीन कनस्तर पीट-पीट कर गला फाड़कर चिल्लाना...( टीन के नश्तर)
पंकज खन्ना, इंदौर।
9424810575
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गीत: टिन कनस्तर पीट-पीट कर। फ़िल्म: लव मैरिज (1959)। गायक: मोहम्मद रफ़ी। गीतकार: शैलेन्द्र। संगीतकार: शंकर–जयकिशन। पर्दे पर: देव आनन्द और माला सिन्हा।( फिल्म लव मैरिज फिल्म के सभी गाने।)
बहुत दिनों बाद आज फिर हमारी और आपकी पहली पसंद: तवा संगीत! नए साल का पहला ब्लॉग पोस्ट पुराने तवे पर। काफी दिनों के बाद कुछ भी और Magic Square को छोड़कर घर वापसी हो रही है। रूठे तवों को मनाकर मन प्रफुल्लित है। अब झेलो;)
आज का तवा बिल्कुल मन की बात कहता है। आप शीर्षक पढ़कर ही समझ जाएंगे: टीन-कनस्तर पीट-पीटकर, गला फाड़कर चिल्लाना। यार मेरे, मत बुरा मान, ये गाना है न बजाना है ।
सन 1959 में ही शंकर जयकिशन/शैलेन्द्र/मुहम्मद रफी/ देव आनन्द की चौकड़ी ने इस बेहतरीन गीत द्वारा संगीतकारों, गीतकारों, गायकों और सुनने वालों को गंभीर चेतावनी दे डाली थी: पाश्चात्य गानों की नकल मत करो, हल्ला गुल्ला छोड़ो, अपना संगीत सुनो और सुनाओ। किसी ने भी इस गीत की बातों को गंभीरता से नहीं लिया। तब भी और आज भी।
इसमें शैलेन्द्र/शंकर–जयकिशन / मोहम्मद रफी ने उस दौर के बॉलीवुड पर बड़ी शालीनता से कटाक्ष किया है, जब पश्चिमी संगीत की नकल आधुनिकता का प्रमाण मानी जाने लगी थी। आज तो हालत बदतर हैं।
शैलेन्द्र के शब्द और परदे पर देव आनंद की मौजूदगी मिलकर इस गीत को महज मनोरंजन नहीं रहने देती। यह रचना वास्तव में अपने समय पर किया गया एक हल्का, मगर तीखा सांस्कृतिक व्यंग्य है।
यही कारण है कि यह गीत भले ही “सदाबहार” न कहलाता हो, लेकिन आज भी सुनते ही उस दौर की, और आजके दौर की भी, सच्चाई को मुस्कान के साथ उजागर कर देता है।
हमारे वो दोस्त जो गाने बजाने के नाम पर बुरी आवाजों का (बड़े-बड़े कान फाड़ू स्पीकरों और अन्य 'टीन कनस्तर टाइप' के वाद्य यंत्रों के साथ होटलों, सभागृहों प्राकृतिक वन-उपवनों में भी) शोर पसंद करते हैं उनको इस फिल्म लव मैरिज का ये गीत अवश्य सुनना चाहिए।
वो हमारी बात नही सुनेंगे और शायद ये गाना भी नहीं सुनेंगे। और हम भी कहां रुकने वाले हैं!? जब मौका मिलेगा तब आक्रमण कर देंगे! सब दोस्त हैं हमारे। बस वो उछल कूद करने वाले बेचारे दोस्त तवा भाजी और अदरक का स्वाद नहीं जानते हैं:)
आपको बताते चलें कि हमें भी कभी-कभी पार्टी और डांस अच्छे लगते हैं। लेकिन रोजमर्रा की जिंदगी में धीमे स्वरों में घर में शांति से बैठकर बगैर उछले देसी फिल्मी संगीत सुनना ही आनंददायक लगता है। तवा संगीत बनाया ही इसीलिए गया है।
वैसे आज के इस गाने की शुरुआत में सन 1950 के दशक वाले क्लब में उस दौर के लड़के लड़कियों द्वारा किया गया डांस बहुत बिंदास और मनोहारी है। बीते दिन याद दिलाता है। इसे देखें भी और अगली पार्टी में करें भी। हिल-हिल कर, उछल-उछल कर और लेट-लेट कर! हम देखेंगे...!
अरे आप इतनी ज़िद कर रहे हैं तो हम भी डांस कर लेंगे! हिल-हिल कर, उछल-उछल कर और लेट-लेट कर आप सबके साथ!
निवेदन सिर्फ इतना है कि इस टीन के नश्तर को 'संगीत संध्या' का नाम न दें! कान से खून निकाल देते हैं ये टीन कनस्तर यानि टीन के नश्तर!
चलिए अब गीत के बोल भी पढ़ लीजिए:
टीन-कनस्तर पीट-पीटकर, गला फाड़कर चिल्लाना। यार मेरे, मत बुरा मान, ये गाना है न बजाना है। टीन-कनस्तर...
नाच के बदले कमर नचाना, उछलके सर्कस दिखलाना। भूल है तेरी, तू समझा है दुनिया पागलख़ाना है।
टीन-कनस्तर पीट-पीटकर, गला फाड़कर चिल्लाना। यार मेरे, मत बुरा मान, ये गाना है न बजाना है। टीन-कनस्तर...
उधर से लेकर इधर जमाकर, कब तक काम चलाओगे किसका रहा ज़माना, एक दिन महफ़िल से उठ जाओगे।
महफ़िल से उठ जाओगे। नक़ल का धँधा चल नहीं सकता, एक दिन तो पछताना है। यार मेरे, मत बुरा मान, ये गाना है न बजाना है। टीन-कनस्तर...
भूल गया तू, तानसेन की तान यहीं पर गूँजी थी। सुर के जादूगर बैजू की शान यहीं पर गूँजी थी। मरके अमर है सहगल, उसका हर कोई दीवाना है। हर कोई दीवाना है। मरके अमर है सहगल, उसका हर कोई दीवाना है।
यार मेरे, मत बुरा मान, ये गाना है न बजाना है।
टीन-कनस्तर पीट-पीटकर, गला फाड़कर चिल्लाना। यार मेरे, मत बुरा मान, ये गाना है न बजाना है। टीन-कनस्तर...
बहुत अच्छा लगता है कि इस गाने में तानसेन, बैजू बावरा और सहगल को एक साथ अच्छे से याद किया गया है: भूल गया तू, तानसेन की तान यहीं पर गूँजी थी। सुर के जादूगर बैजू की शान यहीं पर गूँजी थी। मरके अमर है सहगल, उसका हर कोई दीवाना है।
इस फिल्म के ये तीन गीत बहुत प्रसिद्ध हुए थे जो आपने निश्चित ही सुने हैं :
कहे झूम झूम रात ये सुहानी। (लता)
धीरे धीरे चल चांद गगन में। (लता, रफी।)
कहां जा रहे थे, कहां आ गए हम। (रफी)
(फिल्म लव मैरिज फिल्म के सभी गाने इसी लिंक से सुन सकते हैं।)
फिल्म लव मैरिज का गाना 'शी ने खेला ही से' क्रिकेट ग्राउंड पर फिल्माया गया है जिसे आप लिंक दबाकर देख सकते हैं।क्रिकेट के मैदान पर छोरे-छोरी का ब्लैक एंड व्हाइट में सामूहिक डांस यहीं देखने को मिलेगा: शी ने खेला ही से। मस्त है एकदम!
और लव मैरिज (1959) संभवतः पहली हिंदी फिल्म थी जिसमें हीरो को क्रिकेटर दिखाया गया हो। अधिक लोगों को पता नहीं होगा कि देव आनन्द पर्दे पर पचास के दशक में ही बहुत सारे चौके छक्के उड़ा चुके हैं। भुवन के आगमन से 40 साल पहले।
सन 1959 की फिल्म के बाद सन 1990 में आई संभवतः दूसरी 'क्रिकेट' फिल्म 'अव्वल नंबर' का भी देव आनन्द से सीधा संबंध था।
आज की फिल्म 'लव मैरिज' के दशकों बाद कुछ और फिल्मों में भी क्रिकेट या क्रिकेटर दिखलाई दिए जैसे: अव्वल नंबर (1990), लगान (2001), इकबाल (2005), दिल बोले हड़िप्पा (2009), पटियाला हाउस (2011), फरारी की सवारी (2012), काय पो छे (2013), एम.एस. धोनी (2016), अज़हर (2016), सचिन: ए बिलियन ड्रीम्स (2017), द जोया फैक्टर (2019), और 83 (2021)। कुछ छूट भी गई होगी।
आओ अब आपको इस तवे की कहानी भी संक्षेप में सुनाई और दिखाई जाए। ये तवा हमारे संग्रह में सन 1990 से है। इसकी आमद भी कबाड़ी बाज़ार से ही हुई है। ऐसे नगीने अब कबाड़ी बाजार में भी ढूंढे नहीं मिलते हैं। बस कबाड़ियों के घरों में ही मिलते हैं। आओ कभी कबाड़ख़ाने में, तवे जरूर मिलेंगे खाने में! और गाने में भी!
इस तवे का कवर Columbia Records का है जबकि तवा खुद HMV का है। इसका Cover/Sleeve और रिकॉर्ड मेल नहीं खाते हैं। लेकिन इन्हें उसी प्रकार से Mismatch के साथ ही आज तक रखा गया है। ये Mismatch ही Perfect मैच है!
इस तवे के कवर पर बना आर्ट वर्क बहुत पसंद है। कुछ लाग लपेट नहीं। बस कुछ पेड़ और थोड़ी सी चिड़ियाएं। किसी सहृदय बाल मन वाले कलाकार ने ही इस आर्ट वर्क को बनाया होगा। ( तवे के आर्ट वर्क को बनाने वाले आर्टिस्ट क्यों गुमनाम हैं!? इनके बारे में भी कभी जरूर लिखा जाएगा।)
अब बात करते हैं इस तवे पर खूबसूरत लिखावट में लिखे प्यार भरे संदेश की। बस आप खुद ही पढ़ लीजिए, फोटो को थोड़ा और बड़ा कर देते हैं। आपको कष्ट ना हो!
सन 1968 के इस प्यारे संदेश के कारण इस तवे की खूबसूरती कई गुना बढ़ जाती है। उम्मीद है कि मधुचंदा, बच्चू और उनके परिजनों तक ये ब्लॉग कभी न कभी जरूर पहुंचेगा। शायद ये बात भी तब समझ में आ सके कि इस Cover/ Sleeve का असली रिकॉर्ड कौनसा था।
सौभाग्य है हमारा कि 'हमारे हरम' में कुछ ऐसी 'श्याम सुंदरियां' ( 78 rpm Records या तवे) दिल लुभाने के लिए सदैव तत्पर रहती हैं। पूरा विश्वास है कि इस नए साल में टीन कनस्तर के संगीत को पीछे छोड़कर कुछ और लुकी-छुपी श्याम सुन्दरियां नए ब्लॉग पोस्ट के रूप में मधुर संगीत के साथ प्रकट होंगी और आप उन्हें पसंद भी करेंगे।